Crop Management

फसल उत्पादन एवं प्रबंध ( Crop Production and Management ) NCERT Class 8 Science Chapter 1 Notes in Hindi Medium.


Chapter 1 :  फसल उत्पादन एवं प्रबंध ( Crop Production and Management )



प्रमुख शब्द :

► किसी  स्थान पर बड़े पैमाने में उगाये जाने वाले एक ही प्रकार के पौधों  को फसल कहते हैं

► मिट्टी को उलटने-पलटने एवं पोला करने की प्रक्रिया जुताई कहलाती है|

► साफ एवं  स्वस्थ  बीजों  को  उचित गहराई  पर बोना बुआई  कहलाता है |

► उचित समय-अन्तराल पर पौधों को जल देना सिंचाई  कहलाता है |

► खेत में अवांछित एवं बिना उगाये पौधे को खरपतवार कहते है, इनको हटाने की प्रक्रिया को निराई कहते हैं |

► पकी हुई फसल को हाथों या मशीन से काटना, कटाई कहलाता है |

► अनाज के दानों को हाथ द्वारा भूसे  से अलग करना, फटकना कहलाता है |

अनाज के दानों को मशीन द्वारा भूसे  से अलग करना, थ्रेसिंग कहलाता है |

फ़सल के दानों को अधिक समय तक नमी, कीट, चूहों  एवं सूक्ष्मजीवों से सुरक्षित रखने के लिए बीजों को धुप में सुखाकर रखना भंडारण कहलाता है|

► बड़े पैमाने पर जब पलने वाले पालतू पशुओ को उचित भोजन, आवास, और देखभाल करके उनसे उपयोगी चीजें ( जैसे खाद्य पदार्थ , खाद एवं उर्वरक )  प्राप्त करना, पशुपालन कहलाता है |


भारत में फसलो को ऋतु के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा गया है –

  1.  ख़रीफ फ़सल – वे फसल जिन्हें वर्षा ऋतु में बोया जाता है, ख़रीफ फ़सल कहलाती है|  भारत में वर्षा ऋतु जून से सितम्बर तक होती है | धान ,सोयाबिन , मक्का , कपास  और मूंगफली  ख़रीफ फ़सल के उदाहरण हैं|
  2.  रबी फ़सल – वे फसल जिन्हें शीत ऋतु में बोया जाता है, रबी फ़सल कहलाती है|  भारत में शीत ऋतु अक्टूबर से मार्च तक होती है | गेहूं , चना , मटर ,सरसों ,और अलसी रबी फ़सल के उदाहरण हैं|
  3.  जायद फ़सल – वे फसल जिन्हें ग्रीष्म ऋतु में बोया जाता है, जायद फ़सल कहलाती है|  भारत में ग्रीष्म ऋतु मार्च से जून तक होती है | सब्जियाँ तथा दलहनी फसले जायद फ़सल के उदाहरण हैं|

कृषि पद्धति – अपनी बदती हुई जनसंख्या को भोजन प्रदान करने के लिए हमें विशिष्ट कृषि पद्धतियों को अपनाना होता हैं|

एक विशिष्ट कृषि पद्धति में निम्न चरन होते हैं –

1. मिट्टी तैयार करना – इसमे मिट्टी को पलट कर पोले तैयार किये जातें हैं, ताकि पौधों के जड़ें आसानी से जमीन में जा सके| यह मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवो तथा केंचुओं के वृद्धि में सहायता करती है| मिट्टी को उलटने-पलटने एवं पोला करने की प्रक्रिया जुताई कहलाती है|

► मिट्टी तैयार करने के लिए हम पारंपरिक औज़ारो ( हल तथा कुदाली ) तथा आधुनिक मशीनों ( कल्टीवेटर ) का प्रयोग करतें हैं |

2. बुआई – साफ एवं  स्वस्थ  बीजों  को  उचित गहराई तथा उचित दूरी पर बोना बुआई  कहलाता है | इसमें  किसान अधिक उपज देने वाले बीजों का चयन करते हैं |आज-कल सिड-ड्रिल की सहायता से बुआई की जाती हैं|

3. खाद्य एवं उर्वरक देना – वे पदार्थ जिन्हें मिट्टी में पोषक स्तर बनाए रखने के लिए मिलाया जाता है, उन्हें खाद्य एवं उर्वरक कहते हैं

► खाद एवं उर्वरक में अंतर –

खाद्य 

  • खाद्य एक कार्बनिक ( जैविक ) पदार्थ है जो की पौधों या जन्तु अपशिष्ट में प्राप्त होता है |
  • खाद्य का उत्पादन किसानों द्वारा खेतों में किया जाता है|
  • खाद्य से मिट्टी को नमि प्राप्त होती है|
  • जैसे – ‘ वर्मी कम्पोस्टिंग ‘ तथा केचुओं द्वारा खाद्य का उत्पादन |

उर्वरक

  • उर्वरक एक रासायनिक पदार्थ है जो विशेष पोषको से समृद्ध होता हैं |
  • उर्वरक का उत्पादन फैक्ट्रियों में लिया जाता है|
  • उर्वरक से मिट्टी को नमि प्राप्त नही होती है|
  • जैसे – यूरिया, अमोनिया सल्फेट, पोटाश, NPK इत्यादि|

 

4. सिंचाई – उचित समय-अन्तराल पर पौधों को जल देना सिंचाई कहलाता है |

सिंचाई के स्रोत – कुएँ, जलकूप, तालाब/ झील, नदियाँ, बांध एवं नहर इत्यादि जल के स्रोत हैं|

सिंचाई के तरीके

सिंचाई के पारंपरिक तरीके – इसमे कुआँ, झील, एवं नहरों में उपलब्ध जल को निकाल कर खेतों तक पहुँचने के लिए  मोट ( घिरनी ), चेन पम्प, ढेकली तथा रहट का प्रयोग करतें हैं| इसमें जल बहुत मात्र में व्यर्थ होता है|

सिंचाई के आधुनिक तरीके – इसमे कुआँ, झील, एवं नहरों में उपलब्ध जल को निकाल कर खेतों तक पहुँचने के लिए  मोटर पंप का प्रयोग करतें हैं| पंप को चलाने के लिए डीज़ल, बायोगैस, विधुत तथा सौर उर्जा का उपयोग करतें हैं| इसमें निम्न तरीके शामिल हैं –

(i) छिडकाव तंत्र ( Sprinkler System ) – इस विधि का उपयोग असमतल भूमि के लिए किया जाता है|जहाँ पर जल काम मात्रा में उपलब्ध होता है| इसमें ऊर्ध्व पाइपों के उपरी सिरों पर घूमने वाला नोजल लगा होता है| जिससे जल घूमते हुए नोजल से बहार निकलती हैं | यह कॉफ़ी के खेतो के लिए उपयोगी हटा है|

sprinkler system
चित्र (i) – छिड़काव तंत्र ( Sprinkler System )

Drip System
चित्र (ii) – ड्रिप तंत्र (Drip System)

 

(ii) ड्रिप तंत्र (Drip System) – इस विधि में जल बूँद-बूँद करके सीधे पौधो की जड़ो में गिरता है| यह फलदार पौधों, बगीचों एवं वृक्षों को पानी देने का सर्वोत्तम तरीका है| इस विधि में जल बिलकुल व्यर्थ नही होता|

 

5. निराई – खेत में अवांछित एवं बिना उगाये पौधे को खरपतवार कहते है, इनको हटाने की प्रक्रिया को निराई कहते हैं |

खरपतवारों को हटाने के लिए किसान खुरपी या हैरो का उपयोग  करते हैं|

इसे रसायनों के सहायता से भी नियंत्रण किया जा सकता है, जिन्हें खरपतवारनाशी कहते हैं| जैसे,

2, 4-D खरपतवारनाशी  है|

6. कटाई – पकी हुई फसल को हाथों या मशीन से काटना, कटाई कहलाता है |

हमारे देश में फसल को हाथ से दराँती ( हँसुआ) द्वारा कटा जाता हैं|

फसल काटने वाला मशीन को हार्वेस्टर कहते हैं| कटी गई फसल से बीज/ दानों को भूसे से आलग करना थ्रेसिंग कहलाता हैं| काम्बाइन एक मशीन है जिससे हार्वेस्टिंग तथा थ्रेसिंग दोनों किया जाता हैं|

7. भण्डारण – फ़सल के दानों को अधिक समय तक नमी, कीट, चूहों  एवं सूक्ष्मजीवों से सुरक्षित रखने के लिए बीजों को धुप में सुखाकर रखना भण्डारण कहलाता है|

भण्डारण के लिए किसान जूट के बोरा, धातु के पात्र का उपयोग करते हैं | बीजों का बड़े पैमाने पर भण्डारण के लिए साइलो और भण्डार-गृहों का उपयोग किया जाता है|


 अभ्यास 

लघु उतरीय प्रश्न –

  1. फ़सल क्या है?
  2. फ़सल उगने के प्रथम चरण को क्या कहतें हैं?
  3. खरीब फसल क्या है? दो उदाहरण दीजिए|
  4. रबी फसल क्या है? दो उदाहरण दीजिए|
  5. कार्बनिक खाद्य का उदहारण दीजिए|
  6. रासायनिक उर्वरक का उदहारण दीजिए|
  7. एक खरपतवारनाशी का उदहारण दीजिए|
  8. थ्रेसिंग क्या होता है?
  9. साइलो क्या होता है?
  10. काड लीवर तेल में कौन-सा विटामिन होता है? यह हमे कहाँ से प्राप्त होती है?

दीर्घ उतरीय प्रश्न –

  1. सिंचाई किसे कहते हैं? जल संरक्षित करने वाली सिंचाई के दो विधियों का वर्णन कीजिय|
  2. खरपतवार क्या है ? हम उनका नियंत्रण कैसे कर सकते हैं?

 

नोट: ऊपर दिए गए प्रश्नों के उतर के लिए लिंक पर Click करे|

Download Free Answer PDF

 

कक्षा – 8 के विज्ञान किताब को डाउनलोड करने के लिए निचे लिंक पर Click करे|

हिंदी माध्यम || English Medium

 

Go to HOME Page

  समाप्त  

NEWSLETTER SUBSCRIPTION

Get Monthly And Yearly Magazine Free.

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
error: Content is protected !!